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आठवें महीने में पà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤°à¥à¤® लेबर का खतरा काफी रहता है कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚कि इस समय कà¥à¤› बचà¥â€à¤šà¥‡ सिफेलिक पोजीशन में होते हैं और नौ महीने से पहले ही पैदा हो सकता है। पà¥à¤°à¥€à¤•à¥â€à¤²à¥ˆà¤‚पà¥â€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ और पà¥â€à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा में कोई परेशानी होने की वजह से तà¥à¤°à¤‚त डिलीवरी करवाने की जरूरत पड़ सकती है।
पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर के अनà¥â€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में वजाइनल डिसà¥â€à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ अधिक होना, वजाइनल डिसà¥â€à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ के पà¥à¤°à¤•ार में बदलाव आना (खून या मà¥â€à¤¯à¥‚कस आना), पेट और पेलà¥à¤µà¤¿à¤• हिसà¥â€à¤¸à¥‡ में दबाव महसूस होना, बार-बार पेट में संकà¥à¤šà¤¨ महसूस होना जिसमें दरà¥à¤¦ हो à¤à¥€ सकता है और नहीं à¤à¥€à¥¤
हर 10 मिनट में संकà¥à¤šà¤¨ महसूस होना, कमर दरà¥à¤¦, पेट के निचले हिसà¥â€à¤¸à¥‡ में à¤à¤‚ंठन महसूस होना। इसमें गैस के दरà¥à¤¦ जैसा महसूस हो सकता है जिसमें दसà¥â€à¤¤ à¤à¥€ हो सकते हैं।
फà¥à¤²à¥‚ के लकà¥à¤·à¤£ जैसे कि मतली और उलà¥â€à¤Ÿà¥€ à¤à¤µà¤‚ दसà¥â€à¤¤à¥¤ यदि किसी गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान ये संकेत मिल रहे हैं तो हो सकता है कि उनकी पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° डिलीवरी हो।
पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर के कारण
पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर कई कारणों पर निरà¥à¤à¤° करती है जो कि पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ की गई देखà¤à¤¾à¤² से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ होते हैं। इनमें बताई गई दवाओं का सेवन करना शामिल है।
पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर का निदान
संकेतों और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर जितना जलà¥â€à¤¦à¥€ हो सके गायनेकोâ€à¤²à¥‹à¤œà¤¿à¤¸à¥â€à¤Ÿ से संपरà¥à¤• करें। डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° पेलà¥à¤µà¤¿à¤• जांव से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¥â€à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ में आठबदलाव के बारे में बता पाà¤à¤‚गे और सलाह देंगे कि बचà¥â€à¤šà¥‡ के विकास की नियमित जांच के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤—नेंंट महिला को कब और कितने समय के अंतराल में चेकअप करवाने आना होगा।
इसके अलावा गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¥â€à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ की लंबाई जांचने के लिठटà¥à¤°à¤¾à¤‚सवजाईनल अलà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड की सलाह à¤à¥€ दी जाती है। इससे ये à¤à¥€ पता चल पाà¤à¤—ा कि डिलीवरी के लिठअसà¥â€à¤ªà¤¤à¤¾à¤² जाने का सही समय कà¥â€à¤¯à¤¾ है।
पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर का इलाज
जैसे ही पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° डिलीवरी के संकेत मिलते हैं, वैसे ही पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंट महिला को असà¥â€à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में डिलीवरी के लिठमॉनिटर किया जाता है। जिन मामलों में नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी होने में जटिलताà¤à¤‚ आती हैं, उनमें सिजेरियन ऑपरेशन किया जाता है।
यदि पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर से शिशॠको नà¥à¤•सान हो सकता है तो संकà¥à¤šà¤¨ काे आसान बनाने और पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को धीमा करने के लिठमां को कà¥à¤› दवाà¤à¤‚ दी जाती है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ में देर करने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को टोकोलिटिकà¥â€à¤¸ या मैगà¥â€à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® सलà¥â€à¤«à¥‡à¤Ÿ दी जाती है।
पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥â€à¤¯à¥‹à¤° लेबर से बचने का à¤à¤• तरीका गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ के दौरान उचित देखà¤à¤¾à¤² मिलना à¤à¥€ है। इससे मां और बचà¥â€à¤šà¤¾ दोनों सà¥â€à¤µà¤¸à¥â€à¤¥ रहते हैं। वहीं अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥â€à¤¨à¥‡à¤‚सी के दौरान गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला की ठीक तरह से देखà¤à¤¾à¤² न की जाठतो इसकी वजह से अचानक जटिलताà¤à¤‚ उतà¥â€à¤ªà¤¨à¥â€à¤¨ हो सकती हैं।
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